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मनोज कुमार झा के द्वारा ज़िज़ेक के इन्टरव्यू का रूपान्तर

मनोज कुमार झा के द्वारा  ज़िज़ेक के इन्टरव्यू का रूपान्तर क्या उदारपंथी और लोकरंजकतावादी लोग मालिक की तलाश में हैं ?    हाल के सालों में लोकरंजकतावाद , देशीवाद और राष्ट्रवाद के उभार ने लोगों की राय को बदला है कि जनता  राजनेताओं से क्या अपेक्षा रखती है ? कुछ लोग प्रतिष्ठान-विरोधी प्रवृत्ति को केन्द्रीकृत सत्ता के अस्वीकार की तरह देखते हैं , वहीं कुछ लोग कहते हैं कि असली तलाश एक नैतिक सत्ता की है , जो आज के पूंजीवाद में नहीं दिखती। दूसरी तरह के लोगों में दार्शनिक स्लावोज जिजेक भी है। वे राजनीतिक तौर पर सही दिखने वाली अपील की आलोचना करते हैं , बिना राज्य के हस्तक्षेप के बाजार के बचे रहने की क्षमता को प्रश्नांकित करते हैं और फेयर ट्रेड के रसायन के पीछे के निहित स्वार्थ को सामने लाते हैं। अपनी हालिया किताब , Like a Thief in Broad Daylight'  में इस समय के सामाजिक परिवर्तन के बदल रहे स्वभाव की वह छान-बीन करते हैं , जिसे वह ‘ उत्तर-मानवता का युग ’ कहते हैं। द इकॉनमिस्ट के ओपन फ्यूचर इनिशिएटिव के तहत उन से पाँच सवाल पूछे गए हैं। द इकॉनमिस्ट - ‘ उत्तर मानवता ’ ...