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जुस्तजू से अपनी ही - कुमार मुकुल


कर दे यादों को
भला कोई खारिज कैसे
जुस्तजू से अपनी ही
हो कोई आजिज कैसे

बीती उमर नदिया तो नहीं
कि पलट के पार करे
करता हो कोई
करे वार करे वार करे

टिप्पणियाँ

  1. भूलनेवाले जो हमको थे ख़ैर वो हमको भूल गए
    हमने जितनी भी कोशिश की याद वो ज़्यादा आये हैं

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