मस्तनम्मा एक मज़दूर महिला जो दुनिया की विलक्षण शेफ़ थी और उसके जीवन के 105 वें वर्ष में दुनिया को यह पता चला. नीचे के लिंक पर कल्चर बुकलेट के अंग्रेज़ी वाले सेक्शन में मेरा लिखा लेख पढ़ सकते हैं
ओल के पौधे डीह पर लहलहाने लगे थे हरे-हरे पत्ते देख रहे थे चारों तरफ छोटी-छोटी अँगुल भर की गाँठ लगाई थी थोड़ी -थोड़ी दूर पर यही कोई साल-दो-साल पहले और आज तीन-चार किलो का बड़ा ओल निकाला गया था एक गाँठ कितनी बड़ी हो गयी बढ़कर धीरे-धीरे ठीक इसी तरह बहुत पहले मन पर अकेलेपन की एक छोटी गांठ पड़ी थी माँ आँचल पकड़ पीछे चलते हुए ******************
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